ममता बनर्जी की हार के ये हैं प्रमुख कारण... इसी से मिला बीजेपी को प्रचंड बहुमत

ममता बनर्जी की हार के ये हैं प्रमुख कारण… इसी से मिला बीजेपी को प्रचंड बहुमत

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कोलकाता/आई संवाद/ पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल कर चौंका दिया है, क्योंकि माना जा रहा था कि कड़ी टक्कर होगी, लेकिन नतीजे बता रहे हैं कि जनता का रुख एकतरफा कमल निशान की तरफ ही था। इसी के चलते बीजेपी ने 200 करीब के आसपास जाकर बड़ी जीत हासिल की। मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारों की कमेंट्स पढ़ने के बाद आई संवाद की टीम ने ममता बनर्जी की हार के कुछ कारण निकाले हैं, जिसे हम आपसे साझा करेंगे।

शिक्षक भर्ती घोटाला एक कारण
ममता बनर्जी की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार का मुद्दा रहा। बंगाल में युवाओं में बहुचर्चित ‘शिक्षक भर्ती घोटाले’ को लेकर आक्रोश नजर आ रहा था, क्योंकि योग्य युवाओं को नौकरी से वंचित होना पड़ा। कई बड़े नेताओं के घरों से करोड़ों रुपये का कैश बरामद हुआ। केंद्रीय जांच एजेंसियों की रेड में खुलासे ने टीएमसी सरकार को दागी कर दिया। जिससे जनता का भरोसा सरकार पर से उठ गया।

15 साल की सरकार की एंटी इंकमबेंसी
पिछले 15 साल से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार थी, जिसके चलते 2011 का इतिहास दोहराया गया, और जिस तरह से लेफ्ट को हराकर ममता ने सत्ता पाई थी, ठीक उसी तरह सत्ता विरोधी लहर का सामना उन्हें करना पड़ा। निचले स्तर पर पार्टी नेताओं की मनमानी, सिंडिकेट राज और जबरन वसूली की बात भी निकलकर आ रही थी, उसके कारण आम आदमी त्रस्त था।

रोजगार संकट और युवाओं की नाराजगी उजागर
ममता सरकार ने महिलाओं और गरीबों को रिझाने के लिए लक्ष्मी भंडार जैसी कई नगद योजनाएं चलाई, लेकिन रोजगार नहीं दे पाने, कोई नई इंडस्ट्री स्थापित नहीं कर पाने के कारण युवाओं में घोर नाराजगी थी। बीजेपी ने अपने प्रचार में इसी नब्ज को पकड़ा, युवाओं से गुजरात मॉडल की तरह इंडस्ट्रियां लगाने का वादा किया।

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वोटर लिस्ट को किया अपडेट
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को लेकर विशेष जांच की थी, जिसमें भारी संख्या में फर्जी वोटर्स का खुलासा हुआ। टीएमसी ने इस विरोध जताया तो जनता उससे भी नाराज नजर आई, कई मुस्लिम इलाकों में भी बीजेपी के पक्ष में वोट पड़ने की बात निकलकर सामने आ रही है। चुनाव आयोग की कवायद के बाद हजारों में नाम कटने से फर्जी मतदाताओं में कमी आई, जिसका फायदा बीजेपी को मिलता नजर आया।

शुभेंदु अधिकारी ने बनाई ध्रुवीकरण की रणनीति

कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी  इस बार उनके लिए सबसे बड़ा काल साबित हुए। टीएमसी के खिलाफ आक्रामक चेहरे के रुप में ममता बनर्जी के सामने और दो जगह से चुनाव लड़ा। साथ ही, बंगाल में वामदलों और कांग्रेस के पास कोई जनाधार नहीं बचा था, जिससे सारा ‘एंटी-टीएमसी’ वोट सीधे बीजेपी के खाते में ट्रांसफर हो गया, सत्ता के गलियारों में एक तरफा बहुमत के साथ बीजेपी काबिज हो गई।

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