इंदौर/उज्जैन/आई संवाद/ पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में समर्पित राष्ट्रव्यापी संस्था ‘सृष्टि सेवा संकल्प’ की दो दिवसीय ‘अखिल भारतीय चिंतन बैठक’ धर्मनगरी उज्जैन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए पर्यावरण विशेषज्ञों, समाजसेवियों और संगठन के पदाधिकारियों ने प्रकृति संरक्षण के भविष्य का रोडमैप तैयार किया था। अब इन निर्णयों को जमीनी धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जिले में बैठकें और कार्य तेजी से प्रारंभ हो गए हैं।
आगामी सिंहस्थ को लेकर बड़े संकल्प और रणनीतियां
बैठक में आगामी सिंहस्थ महापर्व को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिन पर जिला स्तर पर काम शुरू हो चुका है।
सिंहस्थ जन जागरण समितियां: ‘सृष्टि सेवक’ आगामी 6 महीनों के भीतर देश भर में 5 हजार से अधिक सिंहस्थ जन जागरण समितियों का गठन करेंगे।
सिंहस्थ स्मृति वन: उज्जैन की पवित्र मिट्टी को देश के विभिन्न जिलों में ले जाया जाएगा, जहाँ ‘सिंहस्थ स्मृति वन’ निर्मित किए जाएंगे।
प्लास्टिक मुक्त सिंहस्थ (बोतल बैंक): सिंहस्थ के दौरान लोग प्लास्टिक की जगह स्टील की बोतलों का उपयोग करें, इसके लिए संस्था द्वारा एक ‘बोतल बैंक’ तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में सशुल्क कपड़े के थैले वितरित किए जाएंगे।
पिछले वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा: बैठक के प्रथम सत्र में संस्था द्वारा बीते वर्ष चलाए गए अभियानों की विस्तृत समीक्षा की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि वृक्षारोपण, जल पुनर्भरण (Water Recharging) प्रोजेक्ट्स और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों के बेहद उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। साथ ही, उन क्षेत्रों की भी पहचान की गई जहां आगामी वर्ष में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
वार्षिक कार्यक्रम कैलेंडर का विमोचन एवं आगामी योजनाएं
चिंतन बैठक के दूसरे दिन संस्था ने आगामी वर्ष के लिए अपना ‘वार्षिक कार्यक्रम कैलेंडर’ जारी किया, जिसके तहत निम्नलिखित प्रमुख योजनाएं संचालित की जाएंगी:
सघन वृक्षारोपण अभियान: आगामी वर्षा ऋतु में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ‘मियांवाकी पद्धति’ से लाखों पौधों का रोपण किया जाएगा।
जल शक्ति संवाद: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
प्लास्टिक मुक्त भारत संकल्प: सिंगल यूज प्लास्टिक के विरुद्ध जमीनी स्तर पर बड़ी मुहिम शुरू होगी।
पर्यावरण शिक्षा: शिक्षण संस्थानों में जाकर युवाओं और बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
सामूहिक प्रयास पर बल
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व ने कहा, ‘पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व है। उज्जैन की इस पावन धरा पर लिया गया संकल्प आने वाले समय में देश के कोने-कोने तक पर्यावरण चेतना का विस्तार करेगा।‘ बैठक के समापन पर देश भर से आए प्रतिनिधियों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने पर्यावरण को बचाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की सामूहिक शपथ ली।









