निगम-मंडल, आयोगों के अध्यक्षों को सख्त हिदायत... करीबियों को रखें कामकाज से दूर!

निगम-मंडल, आयोगों के अध्यक्षों को सख्त हिदायत… करीबियों को रखें कामकाज से दूर!

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भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश बीजेपी संगठन पूरी तरह से सत्ता पक्ष के नेताओं को पार्टी गाइडलाइन पर चलाने की कोशिश में जुटा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बेहतर समन्वय की तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, जिसकी बानगी निगम-मंडल, आयोगों और प्राधिकरणों की नियुक्ति में साफ देखी गई है। वहीं अब बीजेपी संगठन ने नेताओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। जिसके चलते कई नेताओं को अपने बर्ताव में बदलाव लाना होगा, वरना उनका पद कभी भी जा सकता है।

बीजेपी संगठन की कड़ी चेतावनी
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ संदेश दिया है कि निगमों-मंडलों के साथ ही आयोगों और प्राधिकरणों अध्यक्षों के लिए लक्ष्मण रेखा तय कर दी गई है। उन्हें ज्यादा अवहेलना या दिखावा ना करने की हिदायत दी गई है, और यदि उन्हें इस गाइडलाइन के इतर जाकर काम किया तो उनका पद भी जा सकता है। नेताओं के करीबियों को भी समझाने को कहा गया है कि वो भी ज्यादा से ज्यादा पार्टी के काम में जुटे रहे, ताकि आगामी चुनौतियों का सामना आसानी से किया जा सके।

सादा जीवन, उच्च विचार का संदेश
बीजेपी की गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि नेता को निजी प्रचार-प्रसार से दूर रहें, होर्डिंग और पोस्टर लगाने पर रोक और गाड़ियों के काफिले को सीमीत रखने के लिए कहा गया है। मतलब कि दिखावे से दूर रहने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही एक और बड़ी सलाह दी गई है कि रिश्तेदारों और दोस्तों को कामकाज से दूर रखें।   PA और स्टाफ में भाई-भतीजावाद को लेकर भी सख्त निर्देश हैं, विवादित लोगों को स्टाफ में जगह ना दें, ताकि पार्टी के नेताओं का जनता के बीच अच्छा मैसेज जाए। जाहिर सी बात है कि पार्टी उन चीजों और कामों से दूर रहने की अपील कर रही है जो पार्टी की साख और आलाकमान के निर्देशों पर सवाल उठाते हों।

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जनता तक पहुंचाए सरकार के काम
बीजेपी सरकार जनता के हित में कई योजनाएं चला रही है, नेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि सरकार के कामकाज को जनता के बीच ले जाएं। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के कामों को पूरी तवज्जो दे, उनके किसी काम को ना टाला जाए। साफ संदेश है कि  अगर पार्टी ने पद से नवाजा है तो अनुशासन में रहकर काम करना होगा और पार्टी नियमों के साथ ही कामों पर ध्यान देना होगा। जिसके चलते विपक्ष के हाथ कोई ऐसा मुद्दा ना लगे कि पार्टी को जवाब देना पड़े।

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