भोपाल/आई संवाद/ अगर आप मध्यप्रदेश की धार्मिक यात्रा पर आ रहे हैं, तो ये जानकारी आपके लिए बेहद ही खास होने वाली है, क्योंकि यहां पर प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर और ओमकारेश्वर के साथ-साथ माता के शक्तिपीठ भी स्थापित हैं। जिनके दर्शन करने से आपकी धार्मिक यात्रा और भी ऐतिहासिक हो जाएगी, जिनके जरिए आपको भगवान शंकर का आशीर्वाद मिलने के साथ-साथ माता के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त होगा।
मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ
मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से 4 पौराणिक शक्तिपीठ स्थित हैं, जहां माता सती के अंग गिरे थे। हरसिद्धि माता मंदिर (उज्जैन), शोणदेश (अमरकंटक), मैहर का शारदा मंदिर और भैरव पर्वत शक्तिपीठ (उज्जैन)। इन स्थानों को 51 शक्तिपीठों में शामिल किया गया हैं, और अत्यधिक पवित्र माने जाते हैं। जिनका दर्शन करने से जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।
मध्यप्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठ और स्थल
हरसिद्धि माता शक्तिपीठ (उज्जैन): शिप्रा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में माता सती की कोहनी गिरी थी। यह मंगल चंडिका के रूप में जानी जाती हैं और उज्जैन की प्रमुख शक्ति हैं। यहाँ अनवरत ज्योति जलती रहती है।
शोणदेश शक्तिपीठ (अमरकंटक): नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक में यह पीठ स्थित है। मान्यता के अनुसार यहां माता सती का दाहिना नितंब गिरा था। इसे शोणदेव या नर्मदा देवी शक्तिपीठ भी कहते हैं।
मैहर माता मंदिर (मैहर, सतना): त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा का यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां मां सती का हार गिरा था, इसलिए इसे मैहर (माई का हार) कहा जाता है।
भैरव पर्वत शक्तिपीठ (उज्जैन): शिप्रा तट पर भैरव पहाड़ियों पर स्थित इसे गडकलिका मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
इनके अलावा, आगर मालवा का मां बगलामुखी धाम, दतिया का पीतांबरा पीठ और सीहोर का सलकनपुर विजयासन धाम भी प्रदेश के अत्यधिक महत्वपूर्ण माता मंदिर हैं।
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