इंदौर/आई संवाद/ प्रदेश की आर्थिक राजधानी में जल संकट गहराया हुआ है, जनता को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाकर भीषण जल समस्या के निदान के लिए गुहार लगाना पड़ रही है। जनता की समस्या के लिए राजनेताओं के बीच भिड़ंत के नजारे आम हो रहे हैं, कहीं बीजेपी के महापौर और विधायक आमने-सामने हो रहे हैं, तो कहीं पर बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हो रही है। जनता भी सवाल पूछ रही है कि जल कर बढ़ाया, मगर जल तो दो, इस सवाल का जवाब स्थानीय परिस्थितियों के बीच छिपा हुआ है, जिसे खोजने के प्रयास हम आज करेंगे।
महापौर-विधायक, बीजेपी-कांग्रेस पार्षद आमने-सामने
सबसे पहले विवाद की स्थिति महापौर पुष्यमित्र भार्गव और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक महेंद्र हार्डिया के बीच देखने को मिली, जब एक कार्यक्रम में बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौजूदगी में ही नगर निगम की व्यवस्थाओं पर जमकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में पानी का सही तरीके से वितरण नहीं हो रहा है और लोग परेशान हो रहे हैं। हार्डिया ने कहा कि वे 20 साल से विधायक हैं, लेकिन ऐसा जलसंकट पहले कभी नहीं देखा। इसी तरह शहर के वार्ड 26 और वार्ड 45 के पार्षद नर्मदा पानी सप्लाई के वाल्व को लेकर आमने-सामने आ गए, भाजपा पार्षद लालबहादुर वर्मा ने आरोप लगाया कि वार्ड 45 की कांग्रेस पार्षद सोनिला मिमरोट ने जबरन पानी का वाल्व बंद कराने की कोशिश की, जिस पर दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद पुलिस को मामला शांत कराना पड़ा।
क्या शहर में जल संकट?
इंदौर शहर में जिस तरह से जल संकट की स्थिति बनी हुई है, उसने सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि प्यासे गले के हलाकान होने पर राजनेताओं के बीच टकराव की स्थिति बनने पर भी जनता ही पिस रही है, लेकिन जब अंदरुनी सूत्रों को खंगाला गया तो उनका कहना है कि आखिर RO वॉटर प्लांट वालों को कहां से पानी सप्लाई हो रहा है, जोकि वो मिनटों में पानी की सप्लाई कर रहे हैं, वाहनों की वॉशिंग की दुकानों पर रोजना सैकड़ों गैलन पानी बहाया जा रहा है, उनको कहां से पानी मिल रहा है? प्रायवेट टैंकर वाले मुंहमांगे पैसे देने पर आसानी से पानी उपलब्ध करा रहे हैं, वो कहां से पानी ला रहे हैं? जल संकट के बीच इन सवालों पर भी गौर फरमाने की सख्त जरुरत है।
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