इंदौर/आई संवाद/ इंदौर हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें भोजशाला को मंदिर करार दिया गया है कोर्ट ने कहा कि भोजशाला संस्कृत शिक्षा का केंद्र रहा है, जिसके आधार पर फैसला सुनाया गया है। इस आदेश के बाद भोजशाला में महज पूजा-अर्चना की जाएगी।
12 मई को रखा था फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट ने तमाम पक्षों को सुनने के बाद 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद शुक्रवार 15 मई को फैसला सुनाया गया है, जिसमें न्यायाधीश ने कहा कि हम सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने कोर्ट की सहायता की, हमने तथ्यों को देखा, ASI एक्ट को देखा, आर्कियोलॉजी एक विज्ञान है। उसके आधार पर मिले निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है, साथ ही संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को भी देखा जाना है, यह परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का केंद्र था, देवी सरस्वती का मंदिर था, जिसके आधार पर फैसला सुनाया गया है।
वैज्ञानिक सर्वे में क्या कुछ?
हिंदू पक्ष की याचिका पर, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने मार्च 2024 में एएसआई को परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि मौजूदा ढांचा पहले से मौजूद मंदिरों के हिस्सों से बना है, जिसमें स्तंभों पर घंटी और कमल की आकृतियां मिली हैं, हालांकि मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी) ने एएसआई की रिपोर्ट को ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ करार दिया, जिसके बाद उन्होंने फैसले का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।
कहां है वाग्देवी की मूर्ति?
अंग्रेजों के शासनकाल में भोजशाला की खुदाई कराई गई थी, जिसमें मां वाग्देवी की मूर्ति निकली थी, जिसे एक अंग्रेज अफसर लंदन ले गया, जोकि फिलहाल लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में मौजूद है, हिंदू पक्ष अब उस प्रतिमा को फिर से लाकर भोजशाला में स्थापित करने की मांग कर रहा है। 2026 में, इंदौर हाई कोर्ट के समक्ष ASI की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियों और दलीलों के साथ इस मामले में कानूनी कार्यवाही जारी है।
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