इंदौर की सड़कों के तीन किस्से... शायद हर शख्स इससे हुआ है रुबरु

इंदौर की सड़कों के तीन किस्से… शायद हर शख्स इससे हुआ है रुबरु

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इंदौर/आई संवाद/ इंदौर में वापसी को कुछ ही दिन हुए हैं, यहां के चप्पे-चप्पे से वाकिफ होने के बावजूद बदली फिजां कुछ अलग ही कहती है। कभी यहां पर पुरानी दुकानें, हमको पुराने दिनों की याद दिला देती है, तो नई इमारतें यादों को भुला देती है। ये बातें लिखना इसीलिये जरुरी लग रहा था, क्योंकि जब आप अपने शहर में कुछ अलग देखते हैं, तो पाते हैं कि इस पर क्या किया जाए। बनिस्बत किसी बात पर हमारा काम कलम से शब्द उकेरना है, तो हम यही कर रहे हैं।

किस्सा नंबर एक
इंदौर के ट्रैफिक सिग्नलों पर जब रुका, तो सबकुछ वैसा ही था, जो हर शहर में होता है, सड़क के चारों तरफ गाड़ियां रुकी थी, लोग ग्रीन सिग्नल होने के इंतजार कर रहे थे, लेकिन करीब-करीब हर छोटे चौराहों पर जब सिग्नल पर निकला, और सिग्नल चालू हुआ, तो हर बार कोई ना कोई शख्स अपना सिग्नल बंद होने के बाद भी चौराहे को क्रॉस करते मिला। हद तो तब हो गई, जब एक दिन सिग्नल पर रास्ता मांगते तीन मोहतरमाएं आगे तक पहुंची, और रेड सिग्नल के इशारे को दरकिनार करते हुए, अपने अगले पड़ाव पर निकल गई, ऐसा क्यों रहा है, सोचने पर मजबूर कर गया।

किस्सा नंबर दो
इंदौर के मिल क्षेत्र की कई दुकाने बड़ी पुरानी है, सालों से यहां पर लोग आ जा रहे हैं, मिलों के समय की कई यादें पर यहां पर ताजा है, इन्हीं में शामिल मालवा मिल चौराहे पर एक पान की दुकान पर है, जहां पर सालों से हमारा जाना हो रहा है। अभी कुछ दिनों से फिर आना-जाना शुरु हुआ। सड़क छोटी है, तो मैंने अपनी आदत के अनुसार सीधी बाइक लगाई, लेकिन इसी बीच एक-एक कर दो साहब आए, और गाड़ी के पीछे आड़ी गाड़ी लगा दी, मैंने उनमें से एक शख्स को कहा कि मुझे गाड़ी निकालना है, आप हटा दीजिए, तो उसने रुकने का इशारा किया, यही सिलसिला अगले दो-तीन दिन चलता रहा तो दुकानदार से बात की, तो उस बुजुर्ग शख्स ने कहा कि ये तो ठीक है, कल तो मेरी दुकान के आगे आड़ी गाड़ी लगाकर एक शख्स दूसरी दुकान पर चला गया, मैंने फिर कहा वाह!

किस्सा नंबर तीन
पिछले दोनों किस्से आलोचनात्मक हो गए, लेकिन तीसरा इंदौर की असली तासीर को बयां करता है। दरअसल इंदौर में पारा 43 डिग्री को पार कर रहा था, इसी दौरान हमारा निकलना पाटनीपुरा से आगे भमोरी पुल की तरफ हुआ। भीषण गर्मी में हलक सूखी हुई थी, तभी एक दंपति आरओ के कैम्पर लेकर लोगों को पानी पिलाते दिखी, वो बुला-बुलाकर पानी पिला रहे थे। उन्हें देखकर सुकून मिला, और दो तांबे के लौटे भरकर मैंने ठंडा पानी पिया। उसके बाद दंपति ने मीठी नुक्ती का प्रसाद देकर ‘जय श्रीराम’ भी कहा, तो मन शांति के साथ भक्ति से भी भर गया। कुल मिलाकर इन किस्सों को बताने का उद्देश्य है कि इनसे समझ तो मिलती है।

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