सिंधिया के गढ़ में एक और बीजेपी नेता का इस्तीफा... कांग्रेस में खुशी की लहर!

सिंधिया के गढ़ में एक और बीजेपी नेता का इस्तीफा… कांग्रेस में खुशी की लहर!

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भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश की सियासत में सिंधिया खेमे में कितना कुछ ठीक चल रहा है, इसकी बानगी ग्वालियर के वार्ड क्रमांक 25 से पूर्व पार्षद एवं सिंधिया समर्थक देवेंद्र पाठक के इस्तीफा देने के बाद साफ हो गया कि जिस तरह की सियासत का स्वाद इन नेताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस में रहते चखा था, वैसा बीजेपी में नहीं हो रहा, क्योंकि उस समय कांग्रेस की तरफ से ग्वालियर-चंबल के सबसे बड़े नेता सिंधिया ही जाने जाते थे। महाराज की सहमति के बिना पूरे इलाके में कांग्रेस का कोई निर्णय अकेले नहीं लिया जाता था, जबकि अब इस पूरे इलाके में कई कद्दावर मौजूद हैं, जिसके चलते सिंधिया समर्थकों में पशोपेश की स्थिति बन गई है।

गुना के बीजेपी नेता ने दिया इस्तीफा
ग्वालियर-चंबल की राजनीति में एक बार फिर भाजपा की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र की प्रतिनिधित्व करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मुखर हो चुके हैं, इसी का नतीजा है कि जिले के भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला महामंत्री चंद्रपाल किरार (बंटी) ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। ये इस्तीफा इसीलिये भी मायने रखता है, क्योंकि पार्टी के भीतर सिंधिया समर्थक और अन्य गुटों के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाजी का दौर जारी है, जोकि प्रदेश में सुर्खियों में बना हुआ है।

बीजेपी ने चंद्रपाल किरार को दिया था नोटिस
बीजेपी नेता चंद्रपाल किरार पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया था, इस नोटिस का जवाब देने की बजाय किरार ने पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया, इस्तीफे में उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि पिछले तीन वर्षों से उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा और उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई, जिसके चलते वो पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।

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सिंधिया-केपी यादव समर्थकों के बीच टकराव
गुना भाजपा में गुटबाजी अब सतह पर आ गई है, जिसके चलते पार्टी की एकता पर सवाल उठने लगे हैं, कुछ दिन पहले ही सिंधिया और केपी यादव समर्थकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, वो लगातार सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे थे। अब एक वरिष्ठ ओबीसी नेता का पद छोड़ना यह संकेत दे रहा है कि मामला केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।

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