भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को जनता ‘मामा’ के रुप में जानती है, समय-समय पर वो किसान के रुप में भी नजर आए हैं, जो राह चलते लोगों की मदद करने में भी गुरैज नहीं करते। इन सबसे अलग शिवराज सिंह चौहान अब नए अंदाज में नजर आए है, और वो है ‘लेखक’ का अंदाज। मामा शिवराज लेखन की दुनिया में भी कदम रख चुके हैं। उन्होंने पीएम मोदी के साथ अपने 35 सालों के अनुभवों को साझा करते हुए किताब लिखी है, और उसको नाम दिया है, ‘अपनापन’।
जनता को बताई किताब की खूबियां
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि 26 मई को दिल्ली में ‘अपनापन’ लांच होगी। सुबह 10.30 बजे नई दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में नई किताब का विमोचन किया जाएगा। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा लोकार्पण समारोह में किताब का विमोचन करेंगे। जिसमें अन्य गणमान्य अतिथि भी शिरकत करेंगे।
पीएम मोदी से 35 सालों का नाता
शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले तीन दशकों में उन्हें पीएम मोदी के साथ काम करने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा भावना, संगठन क्षमता, सुशासन और देश के प्रति समर्पण को करीब से देखा-समझा। शिवराज ने बताया कि इन्हीं अनुभवों, भावनाओं और जीवन से मिली प्रेरणाओं को अपनी किताब ‘अपनापन’ में जगह दी है। चौहान बताते हैं कि यह किताब सिर्फ अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, देशभक्ति और जनकल्याण जैसे मूल्यों से जुड़ी एक प्रेरणादायक यात्रा है।
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किताब की खास बातें
‘अपनापन’ किताब में साल 1991 के अनुभवों को भी जगह दी गई है। जिसमें बताया गया है कि कैसे शिवराज का पीएम मोदी से 35 सालों का पुराना नाता है, जिसको साझा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ‘मैंने 1991 से एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के तौर पर उनके साथ काम किया, जब भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक ‘एकता यात्रा’ निकाली थी। वह संगठनात्मक काम देखते थे और मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष था और पहली बार सांसद भी चुना गया था।’
अन्य यादों को भी मिला स्थान
चौहान आगे बताते हैं कि जब पीएम मोदी राष्ट्रीय महासचिव बने, तो मध्यप्रदेश में भाजपा प्रभारी बनाए गए थे, तब वे भी राज्य में महासचिव थे। चौहान ने प्रधानमंत्री के साथ काम करने के अपने अनुभव भी इस किताब में लिखे हैं। चौहान बताते हैं कि वे ‘एकता यात्रा’ के प्रभारी थे और उन्हें ‘केसरिया वाहिनी’ का संयोजक बनाया था, जिसका मकसद युवाओं से जुड़ना था। इस तरह उन्होंने संगठन में एक कार्यकर्ता के रूप में कई वर्षों तक उनके साथ काम किया। उसके बाद एमपी के मुख्यमंत्री के रुप में काम करने के दौरान मोदी प्रधानमंत्री बने, इस दौरान कोविड महामारी और पहलगाम आतंकी हमले के बाद के निर्णयों को उन्होंने सदृश्य देखा।
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