भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश की सरकारी शिक्षण व्यवस्था को सुधारने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, डिजिटल माध्यम से स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था करने के साथ मेधावी छात्र-छात्राओं को लेपटॉप का वितरण किया जा रहा है। सीएम राइज जैसी उच्च कोटी की स्कूलों में एडमिशन देकर बच्चों को बेहतर शिक्षा का विकल्प पेश किया गया है। उच्च क्षमता वाली शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता होती है, जिनकी भर्ती सरकार तमाम पैमानों पर करती है, लेकिन उसके बाद उन पर पढ़ाई के अलावा अन्य बोझ डाल दिए जाते हैं, ये आरोप वर्तमान परिस्थिति के अनुसार शिक्षक ही लगा रहे हैं।
जनगणना, परीक्षा और आरटीई
मध्यप्रदेश के हजारों शिक्षक फिलहाल जनगणना के काम में जुटे हुए हैं, जिसके चलते तपती गर्मी में उनके सिर पर मानसिक तनाव और काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी में एक साथ चार-चार मोर्चों पर ड्यूटी लगने से शिक्षकों की हालत पस्त हो गई है। इस समस्या के चलते अलग-अलग शिक्षक संगठनों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई कि जनगणना में लगे शिक्षकों को अन्य कार्य से मुक्त किया जाए।
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दिक्कतों से जूझ रहे शिक्षक
शिक्षक संगठनों ने जानकारी देते हुए बताया है कि जनगणना का काम पूरी तरह से ऑनलाइन है, जिसकी समयसीमा निर्धारित है। फील्ड में काम कर रहे शिक्षकों को व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों केवल सुबह के समय ही जानकारी मिल पाती है, वहीं सुरक्षा कारणों से महिला शिक्षक शाम 6 बजे के बाद फील्ड पर नहीं रुक सकती है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच मोबाइल ऐप पर डाटा एंट्री करना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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