भोपाल/आई संवाद/ विधानसभा चुनावों के परिणामों में बीजेपी ने तीन राज्यों में जबरदस्त बहुमत हासिल किया है, राजनीतिक जानकारों को भी ऐसी आशा नहीं थी कि भगवा ब्रिगेड गंगौत्री से गंगासागर तक विजय पताका फहरा जाएगी, लेकिन इन दौरान मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने वाले दो सांसद बुरी तरह हार गए, जोकि वर्तमान में केंद्र में मंत्री भी हैं। ये हार राज्यसभा की राजनीति और धरातल पर जनाधार की पृष्ठभूमि को उजागर करती है। जीहां हम बात कर रहे हैं, मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचने वाले दो केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और जार्ज कुरियन की।
दोनों सांसदों को ऐसे मिली हार
दरअसल, बीजेपी ने तमिलनाडु की अवनाशी सीट से डॉ. एल. मुरुगन को उतारा था, जिनको कमली एस ने 14 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया, हालांकि गनीमत ये रही कि वो दूसरा स्थान पाने में कामयाब रहे। वहीं, केरल की कांजीरापल्ली सीट पर जार्ज कुरियन ने बीजेपी के टिकट पर अपना भाग्य आजमाया, जिन्हें कांग्रेस के रॉनी के बेबी ने 29,662 वोटों के बड़े अंतर से हराया, खास बात ये रही कि कुरियन तीसरे स्थान पर खिसक गए, जो राजनीतिक रुप से एक नया संदेश है, क्योंकि बीजेपी की लहर के बीच केंद्रीय मंत्री चुनाव हार जाए, इसको जनाधार बनाम राज्यसभा की राजनीति में किया गया प्रयोग माना जाना चाहिए।
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इतना बचा दोनों का कार्यकाल
डॉ. एल. मुरुगन का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है, जबकि जार्ज कुरियन का कार्यकाल 19 जून को समाप्त होने वाला है। ऐसे विधानसभा चुनाव हारने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है, लेकिन इससे ये साफ हो गया है कि किसी भी नेता का राजनीतिक कद जनता ही तय करती है, क्योंकि वो सीधे केंद्र की राजनीति करने लग जाए, और उससे छोटे चुनाव में हार जाए, तो साफ है कि जनता से नेता का जुड़ाव बेहद ही जरुरी है।
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